तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
भीषण उमस से 'भट्ठी' बना कोलकाता
कोलकाता। कोलकाता समेत पूरे दक्षिण बंगाल में इन दिनों सूरज की तपिश और जानलेवा उमस ने आम जनजीवन को पूरी तरह बेहाल कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर कदम रखते ही शरीर झुलसने लगता है, और घर के भीतर पंखे भी गर्म हवा फेंक रहे हैं। इस असहनीय मौसम में लोगों के लिए केवल एयर कंडीशनर (एसी) ही एकमात्र सहारा बचा है। अलीपुर मौसम विभाग ने बुधवार को कोलकाता का अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। हालांकि, दोपहर बाद शहर के कुछ हिस्सों में आंधी-बारिश भी हुई, लेकिन इस बौछार ने राहत देने की बजाय उमस को और बढ़ा दिया। मौसम के अजीब मिजाज के कारण दोपहर करीब दो बजे कोलकाता का रियल फील यानी महसूस होने वाला तापमान रिकॉर्ड 52 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जो वास्तविक तापमान से पूरे 17 डिग्री अधिक था।
अक्सर लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि जब थर्मामीटर का पारा कम है, तो इतनी भीषण गर्मी क्यों लग रही है। दरअसल, मौसम विभाग जो सामान्य तापमान जारी करता है, वह जमीन से करीब दो मीटर की ऊंचाई पर वेदर स्टेशनों में लगे विशेष थर्मामीटरों से मापा जाता है। इसके विपरीत, रियल फील या फील लाइक का मतलब उस तापमान से है, जिसे हमारा शरीर असल में महसूस करता है। यह केवल थर्मामीटर के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि पर्यावरण के कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस रियल फील तापमान को बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका हवा में मौजूद नमी और हवा की रफ्तार की होती है। सामान्य दिनों में जब हमारे शरीर से पसीना निकलता है, तो वह हवा में उड़ जाता है जिससे त्वचा को ठंडक मिलती है लेकिन जब हवा में पहले से ही जलवाष्प की मात्रा बहुत ज्यादा हो, तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर की प्राकृतिक कूलिंग प्रणाली ठप हो जाती है। इसके साथ ही अगर हवा की गति भी थम जाए, तो घुटन और उमस कई गुना बढ़ जाती है, जिससे कम तापमान में भी इंसानी शरीर को भयंकर गर्मी का अहसास होता है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी से भरी भारी हवाओं के कारण दक्षिण बंगाल एक अदृश्य भ_ी में तब्दील हो गया है। सीधे पडऩे वाली तेज धूप ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यही वजह है कि आंकड़ों में भले ही पारा 35 डिग्री दिख रहा हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से लोग 52 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी झेलने को मजबूर हैं।